दार्जीलिंग के बारे में जानकारी

दार्जिलिंग एक बहुत ही पॅापुलर हिल स्टेशन है। यह हिमालयन रेंज में लोकेटेड है। यहां से कंचनजंघा बहुत ही खूबसूरत लगता है- दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी हिमालय की चोटी है। दार्जिलिंग अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढकी हिमालय, और चाय बागानों के लिए मशहूर है। यहां हर साल देश-विदेश से लाखों टूरिस्ट आते हैं। दार्जिलिंग गर्मियों के मौसम में जाना बेस्ट होता है।

दार्जिलिंग का इतिहास दार्जिलिंग का इतिहास19वीं सदी की है। इससे पहले इस शहर पर सिक्किम के राजाओं का राज था। ब्रिटिश राज के दौरान दार्जिलिंग अपने शांत जलवायु के कारण एक फेमस टूरिस्ट प्लेस था। ब्रिटीशों में बहुत पॅापुलर हो गया था, जिन्होंने बाद में यहां स्कूल और बड़े-बड़े इमारत बनाए। यह 1864 में बंगाल प्रेसीडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी बन गई थी। 1856 में दार्जिलिंग में चाय पेश किया गया था और इसके कारण कई ब्रिटिश लोग यहाँ बस गए थे।

दार्जिलिंग की संस्कृति दार्जिलिंग अपने अनेकों प्रकार और स्वाद के चाय के लिए पूरे देशभर में फेमस है। यह टूरिस्ट के लिए सबसे ज़्यादा अटरैक्शन है। यहां का चाय गार्डन पूरे शहर को और भी ज़्यादा खूबसूरत बना देता है। यहां के इस अनोखे चाय गार्डन के कारण टूरिस्ट यहां रूकने को मजबूर हो जाते हैं और देखते हैं की चाय कैसे बनती है। यहां पर ज़्यादातर गोरखा, तिब्बत, बंगाली, बिहारी और चाइनिज लोग आपको देखने को मिलेंगे।

दार्जिलिंग में करने की चीज़े दार्जिलिंग का Toy train बहुत ही फेमस है। यहां का सबसे पॅापुलर है जीप राईड है जो टाइगर हील तक जाती है। घुम मोनास्ट्री यहां का बहुत ही पुराना मोनास्ट्री है, जहां पर आपको बहुत अच्छे और पुरानी किताबें मिल जाएंगी। यहां का हाइकिंग और ट्रेकिंग बहुत ही फेमस है।

हिमाचल के हिल स्टेशन में कुल्लू और मनाली . MERE SATH

हिमाचल प्रदेश के अगर हम हिल स्टेशन की बात करें तो सबसे अच्छी जगह कुल्लू मनाली ही है कुल्लू मनाली में लोग पता नहीं कितने दूरो दूरो से यहां की वादियों का लुफ्त लेने के लिए आते हैं ज्यादातर विदेशी लोग जैसे अंग्रेज तो यहां के बहुत ही दीवाने हैं वह यहां पर ही बसना चाहते हैं पर लेकिन अपने-अपने कामों की वजह से बीच-बीच में यहां की जगह का लुफ्त उठाने जरूर आते हैं और यहां पर आकर बहुत प्रसन्न हो जाते हैं अगर बिदेशी यहां पर आएं और बर्फ गिर जाएं तो उनका नजारा देखने को कुछ और ही मिलता है वह यहां की पूरी तरह वादियों में खो जाते हैं। अंग्रेज यहां की खुली हवा और वादियों की तलाश करने के लिए ही हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली शहर में जरूर आते हैं आपको बता दें, हिमाचल प्रदेश के शहर कुल्लू मनाली में सबसे ज्यादा यात्रा का समय मई जुलाई में आता है और अगर विदेशी लोग जैसे बर्फबारी का इंतजार कर रहे हैं नवंबर से जनवरी के बीच के महीने की बात करें इस समय तो नजारा और भी दो गुना से भी ज्यादा हो जाता है।

आपको खास बात बता दें जो यहां पर यात्रा करने के लिए आ रहे हैं यह यात्रा स्थल जिसका नाम कुल्लू-मनाली है इसके सबसे ज्यादा निकटतम चंडीगढ़ हवाई अड्डा ही आता है यह चंडीगढ़ से केवल 270 किलोमीटर दूर ही है और आपको इसके साथ-साथ बता दें अगर हम कुल्लू से दिल्ली मार्ग की बात करें तो यह 570 किलोमीटर दूर है लोग यहां पर जो आने का प्लान कर रहे हैं वह इन चीजों को ध्यान में रखकर अपना प्रोग्राम बना सकते हैं।

जिसे मैं भूल आया हु वो बार बार याद क्यूं आता है_

हमीं ने बाँधा था बन्धन हमींअब तोड़ आये हैं जहाँ वो मुस्कुराये थे वहाँ दिल छोड़आये हैं।

“जो धरती से अम्बर जोड़े उसका नाम मोहब्बत है , जो शीशे से पत्थर तोड़े उसका नाम मोहब्बत है , क़तरा क़तरा सागर तक तो जाती है हर उम्र, मगर , बहता दरिया वापस मोड़े उसका नाम मोहब्बत है”❤️









कोई खामोश है इतना, बहाने भूल आया हूँ , 

माथे की लकीरों प’ अब बल पड़ने लगे हैं ज़िन्दगी जीने में अब खलल पड़ने लगे हैं हर रोज तुझसे सवाल करता हुँ ए ज़िन्दगी क्युँ अब लोग इक-दूसरे की नकल करने लगे हैं

दिल में हुई हलचल आई फिर उसी की याद | वो तो हो कर किसी और के कर गई मुझे बर्बाद | बीत गए कई दिन बीत गए कई साल | ना हुई एक दूसरे से मुलाकात ना पता चला हाल|

TERA INTJAR ME

दिल में हुई हलचल आई फिर उसी की याद | वो तो हो कर किसी और के  कर गई मुझे बर्बाद |  बीत गए कई दिन बीत गए कई साल | ना हुई एक दूसरे से मुलाकात ना पता चला हाल| sadanand kr. chandrwanshi 

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